महिला अस्पताल के पर्चे पर नहीं होगी एमएमजी अस्प्ताल में जांच

 एक ही कैंपस में संचालित दो सरकारी अस्पतालों का पर्चा अस्पताल प्रबंधन मानने को तैयार नहीं है। इससे महिला अस्पताल से जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं एवं अन्य मरीजों को तीन बार घंटों लाइन में लगना पड़ेगा। मामले में सीएमओ का कहना है दोनों अस्पतालों के सीएमएस से बात की जाएगी। महिला अस्पताल में हार्मोनल और कुछ अन्य जांच की सुविधा नहीं है, इसके लिए मरीजों को एमएमजी अस्पताल भेजा जाता है। पहले महिला अस्पताल के पर्चे के आधार पर ही मरीजों की लैब जांच एमएमजी में की जाती थी लेकिन अब अस्पताल प्रबंधन ने इसमें बदलाव किया है। अस्पताल प्रबंधन ने महिला अस्पताल के पर्चे पर जांच करने से मना कर दिया है और जांच के लिए एमएमजी अस्पताल के पर्चे को अनिवार्य कर दिया है।
महिला अस्पताल में रोजाना 700 से 800 महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। इनमें से 200 मरीजों को हार्मोनल जांच की जरूरत होती है। इन मरीजों को जिला एमएमजी अस्पताल भेजा जाता है। पहले एमएमजी अस्पताल में महिला अस्पताल के पर्चे के आधार पर ही मरीजों की हार्मोनल जांच कर दी जाती थी। अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में मैन पॉवर कम होने को लेकर कर्मचारियों ने इस व्यवस्था पर विरोध जताया, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से अस्पताल के पर्चे पर ही जांच की व्यवस्था लागू की गई है।
पांच जगह लगानी होगी लाइन
गर्भवती महिलाएं महिला अस्पताल में लगभग आधा घंटा लाइन में लगकर पर्चा बनवाती हैं। उसके बाद डॉक्टर के पास पहुंचने में उन्हें डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। डॉक्टर द्वारा हार्मोनल जांच लिखने पर महिला मरीज को जिला एमएमजी अस्पताल में पहुंचकर पर्चा बनवाना पड़ेगा। एमएमजी अस्पताल में रोजाना करीब चार हजार की ओपीडी है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को वहां लाइन में लगकर पर्चा बनवाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा। उसके बाद पैथोलॉजी लैब में कम से कम डेढ़ घंटे का समय लगेगा। एमएमजी अस्पताल की लैब में 12 बजे तक ही जांच के लिए सैंपल लिए जाते हैं। लिहाजा महिला मरीज को जांच के लिए दूसरे दिन भी जाना होगा।
इन जांच के लिए होती है परेशानी
महिला अस्पताल में थाइराइड, विटामिन-डी और विटामिन बी-12 की जांच नहीं होती है। यह जांच निजी लैब पर करीब चार हजार रुपये में होती हैं। यह तीनों जांच गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी होती है।
कोट
मामले में कई बार एमएमजी अस्पताल के सीएमएस और सीएमओ से भी बात कर चुकी हूं। नई व्यवस्था से मरीजों को ज्यादा परेशानी होगी या फिर हजारों रुपये खर्च करके निजी लैब पर जांच करवानी पड़ेगी। महिला अस्पताल से एमएमजी अस्पताल जांच के लिए भेजे जाने वाली महिलाओं को दिक्कत होती है।
दीपा त्यागी, सीएमएस महिला अस्पताल
महिला अस्पताल से आने वाली मरीजों के लिए सुविधा की गई है, पहले उन्हें पर्चा बनवाने के साथ अस्पताल के डॉक्टर से भी वहीं जांच लिखवानी होती थीं लेकिन अब व्यवस्था की गई है कि महिला मरीज को केवल अस्पताल का पर्चा बनवाना है, जिस पर लैब में मौजूद पैथोलॉजिस्ट वह जांच लिख देंगे जो महिला अस्पताल में नहीं होती हैं। इसमें परेशानी नहीं होगी।
डॉ. रविंद्र राणा, सीएमएस, एमएमजी अस्पताल
इस समस्या के समाधान के लिए दोनों अस्पतालों के सीएमएस को साथ बैठाकर उनसे बात की जाएगी और समस्या का समाधान निकाला जाएगा। जांच के लिए दो बार पर्चा बनवाना और दो बार लिखवाना मरीजों को परेशान करने वाली बात है।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ